उसका पछतावा, उसका राज

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अध्याय 135 मेरे साथ आओ

"माँ, क्या कुछ गड़बड़ है?" अपोलो बिस्तर से उठ बैठा, उसका नन्हा-सा चेहरा शंका से भरा हुआ था।

कीरा ठिठकी, आगे बढ़ी और अपोलो को बाँहों में भर लिया। "कुछ भी गलत नहीं है।"

मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी हो, अपोलो के साथ बिताया समय उस पर असर नहीं डाल सकता था।

उसने सोच-विचार किया और तय किया कि वह कुछ दिनों ब...

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